Khaali Peeli Review : अगर यह नहीं पता तो मत देखना "खाली पीली"
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"खाली पीली" ट्रेलर रिव्यु ; वही घिसी - पिटी कहानी के साथ बाजार में आया नया कचरा।
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Movie Review: खाली पीली
Artist: Ishan Khattar, Ananya Pandey Satish Kaushik और jaideep Ahlawat आदि
Director: makbool khan
Ott: Zee Cineplex
Rating: 🌠
5 फिल्में बतौर Asistent director और 5 फिल्में बतौर full time director करने के बाद Ali Abbas Jafar ने ये मान लिया कि उन्हें Hindi cinema के दर्शकों की नब्ज समझ आ गई है। उन्होंने Yashraj films से अपना तंबू समेटा और एक नया तंबू बतौर film निर्माता लगा दिया जी Studios के पड़ोस में। बतौर Producer Ali ने पहली film ‘खाली पीली’ बनाई है, दूसरी film जो वह katrina kaif के साथ बनाना चाहते हैं, उसके लिए पैसा लगाने वाली किसी company के इंतजार में हैं। ‘खाली पीली’ theatre के लिए बनी film है और आपके Dish tv connection पर Zee Cineplex के जरिए Release हुई है। है तो zee 5 पर भी, लेकिन उसके पुराने ग्राहक हैं तो भी इस film को देखने का पैसा अलग से आपको चुकाना पड़ेगा।
Ali Abbas Jafar के यहा ‘पार्टनर इन क्राइम’ हैं makbool khan। मकबूल खान का नाम उतना मकबूल नहीं है जितना उनकी ये film पिछले साल भर से रही है। उनके बारे में खोजने पर पता चलता है कि साल 2008 में उन्होंने film ‘कबूतर’ बनाई, फिर Manoj Bajpai की ‘लंका’ लगाई और अब ‘खाली पीली’। film का नाम वैसे काली पीली रहता तो बेहतर होता। एक Road movie जैसी फील तब उस film में आ सकती थी। वैसे भी ‘टैक्सी नंबर नौ दो ग्यारह’ के बाद से कोई ढंग की कैबी movie आई नहीं है। ‘खाली पीली’ Mumbai की टपोरी भाषा का जुमला है, जो film के final result से मैच कर जाता है।
‘खाली पीली’ का जो कैबी है वो बंदा ब्लैकी है। ‘अमर अकबर एंथनी’ के एंथनी का fan लगता है और वैसे ही बोलने की कोशिश करता है क्योंकि टपोरी वह लगता नहीं है। घर से भागी पूजा उससे टकराती है। Style उसका भी भंकस करने वाला ही है। यहां से शुरू होती है story जिनके बारे में कह सकते हैं, राम मिलाई जोड़ी…! ‘खाली पीली’ देखने के लिए आपके पास बहुत सारा फालतू टाइम (कम से कम दो घंटे) और बड़ा वाला जिगर चाहिए। film का नाम अगर आप अपने पड़ोसी से भी पूछेंगे तो उसे शायद पता न हो कि ऐसी कोई film साल भर से बन भी रही है। film देखने के लिए दो अक्टूबर से उपलब्ध है, इसकी जानकारी तो आपके घर में भी शायद ही किसी को हो, वजह है जी studios की marketing team। उनका भारत अंधेरी से मीरा रोड के आगे शायद नहीं जाता।
फिल्म ‘खाली पीली’ एक घिसी पिटी सी story वाली film है जिसमें 2 नए Hero Heroine के लिए ज्यादा कुछ कर दिखाने का scope नहीं है। Director ने भी उनसे कुछ खास करवाने के लिए अलग से मेहनत की हो लगता नहीं। एंथनी वाली बोली में थोड़ा सा ‘तेजाब’ का और थोड़ा सा ‘रंगीला’ का मुन्ना भी मिलाकर Ishan Khattar ने जो किया है, वह वही कर सकते हैं। इस लड़के में जान है। मेहनत से अभिनय करता है। और, किरदार को जीने में जान लगा देता है। film में अगर किसी को full marks मिलते हैं तो वह ishan Khattar ही हैं।
film ‘खाली पीली’ के बाकी कलाकारों में Ananya Pandey से लेकर सतीश कौशिक और बाकी सब बस अपना काम करते नजर आते हैं। कुछ अलग से value add करने का किसी का जज्बा नहीं दिखता, जयदीप अहलावत को छोड़कर। Jaideep का नाम web series ‘पाताललोक’ के बाद बहुत बड़ा हो चुका है। लेकिन, इस बड़े नाम का फायदा इस छोटी film को मिलता दिखता नहीं। film का हिंदी पट्टी के दर्शकों से बहुत ज्यादा सीधा connect भी नहीं है। film को इसके music का कोई support नहीं है। Photography और editing भी बस ok है। अगर आप अपने smart tv पर ये film साउंड बार के साथ देखना चाहते हैं तो Sound bar ऑफ ही रखिए क्योंकि इसका Sound degine ok नही हैं।
यहां तक पढ़ने के लिए शुक्रिया।
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